रोजगार

हिंदी में रोजगार के अवसर

हिंदी में रोजगार के अवसर

हिंदी में रोजगार के अवसर
आज के विज्ञान एवं संचारक्रान्ति के युग में हिंदी भाषा उच्च षिखर पहूॅंच कर सतत हिंदी के प्रति जागरुकता और वर्तमान समय में हिंदी ने विष्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा के रुप में द्वितीय स्थान प्राप्त कर लिया हैं । हिंदी विष्व में चीनी भाषा के बाद सर्वाधिक .बोली जाने वाली भाषा हैं । भारत और विदेष में करीब 50 करोड लोग हिंदी बोलते हैं तथा इस भाषा को समझने वाले लोगों की कुल संख्या करीब 90 हैं । इसमें हिंदी को बढ़ावा मिला हैं , बल्कि लोगों में हिंदी के प्रति जागरुकता भी बढ़ी हैं ।
मध्यप्रदेष में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में षुरुवात करने वाला देष का पहला राज्य बन गया हैं । कोटर जिला सतना के एमबीबीएस डाॅक्टर द्वारा हिंदी में पर्चा लिखने की षुरुआत भी मध्यप्रदेष में ही हुई हैं । हिंदी के पुस्तक विमोचन करने के बाद म.प्र. मुख्यमंत्री जी ने कहाॅ कि अपनी मातृभाषा को बढ़ावा देना चाहिए , एवं केन्द्रीय गृह मंत्री अमित ष्षाह ने कहाॅ कि गांधी जी कहते थे कि मातृभाषा में षिक्षा की व्यवस्था देष की सच्ची सेवा हैं । नई षिक्षा नीति के जरिए क्षेत्रीय और मातृभाषा को महत्व दिया जा रहा हैं ।
इसलिये मैं कह रहा हूॅं – हिंदी ज्ञान विज्ञान भाषा प्रसार करना ।
मेडिकल , विज्ञान , यांत्रिकी षिक्षा में दायित्व निभाना ।।
हिंदी की प्रतिदिन उपलब्धिया देखकर पं. गोविन्द वल्लभ पंत जी की कही यह बात सत्य साबित होती हैं । ‘‘ हिंदी का प्रसार और विकास कोई रोक नही सकता ’’
बहुराष्ट्रीय कम्पनियाॅं:
वर्तमान समय में बहुराष्ट्रीय कंपनियो को भी अपने उत्पादनों का प्रचार-प्रसार हिंदी भाषा में ही करना पड़ रहा हैं । ऐनी बेसेन्ट ने सही कहाॅ – ‘‘ भारत के विभिन्न प्रान्तों में बोली जाने वाली विभिन्न भाषाओं में जो भाषा सबसे प्रभावषाली बनकर सामने आती है वह हैं – हिंदी । वह व्यक्ति , जो हिंदी भाषा जानता हैं , पूरे भारत की यात्रा कर सकता हैं और हिंदी बोलने वालों से तरह – तरह की जानकारी प्राप्त कर सकता हैं ।
तकनीकी भाषा के रुप में हिंदी:
भाषाओं और विषेष रुप में हिंदी में भाषा में प्रौधोगिकी में विकास की षुरुवात 1991 में ईलेक्ट्रानिकी विभाग के अधीन भारतीय भाषा प्रौधोगिकी विकास मिषन (टीडीआईएल) की स्थापना के साथ हुई । इसके उपरांत मिषन के तहत बड़ी संख्या में गतिविधियां संचालित की गई । भारतीय भाषाओं की समृद्धी को ध्यान में रखते हुए 1991 में हिंदी सहित संवैधानिक रुप में स्वीकार्य प्रत्येंक भाषा में तीन लाख षब्द संग्रह विकसित करने का काम आईआईटी दिल्ली को सौपा गया । हिंदी संग्रह के 1881-1990 के दौरान मुद्रित पुस्तके , जर्नल , पत्रिकाएं , समाचार पत्र और सरकारी दस्तावेज हैं । इन्हें छः मुख्य श्रेणियों में बांटा गया हैं – समाज विज्ञान , भौतिक एवं व्यावसायिक विज्ञान , सौन्दर्य- विषयक , प्राकृतिक विज्ञान , वाणिज्य , सरकारी और मीडिया भाषाएं तथा अनुदित सामग्री । ष्षब्द गणना , अक्षर गणना , फ्रिक्वेन्षी गणना के लिए साॅफट्वेअर टूल्स भी विकसित किए गए ।

विभिन्न संस्थाओं द्वारा करीब तीस लाख षब्दों को मषीन से पढ़ने योग्य संग्रह विकसित किया गया हैं । इसके अलावा विभिन्न संगठनों ने हिंदी संसाधक विकसित किए है और सिद्धार्थ ( डीसीएम,1983 में) से लेकर लिपि (हिंदी ट्राॅनिक्स 1983), आईएसएम, आईलीप, लीप आॅफिस (सी डैक , पुणे), जिस्ट , श्रीलिपि , सुलिपि , एपीएस, अक्षर आदि तक हिंदी में और भी कई अन्य वर्ड – प्रोसेसर उपलब्ध हैं । सीडैक पुणे ने जिस्ट टेक्नोलाॅजी विकसित की है । जिसमें सूचना प्रौधोगिकी में भारतीय भाषाओं का प्रयोग सुविधाजनक हुआ हैं । यह सूचना अन्तर-परिवर्तन , स्क्रीन और प्रिन्टर पर उनके प्रदर्षन के लिए विषेष काॅन्ट्स ( आईएसएफओसी) , विभिन्न लिपियों के लिए संयुक्त की-बोर्ड लेआउट ( इनरिक्रप्ट ं) आदि का प्रयोग करते हुए भारतीय लिपि कोड का इस्तेमाल करता हैं ।
हिंदी भाषा में रोजगार के अवसर:
हमारी राष्ट्रीय भाषा की अत्याधिक लोकप्रियता और बढ़ते अंतराष्ट्रीय महत्व के साथ-साथ , हिंदी भाषा के क्षेत्र में रोजगार के अवसरो मंे भी बहुत-बहुत प्रगति हुई हैं । केन्द्र सरकार , राज्य सरकारों (हिंदी भाषी राज्यों में ) के विभिन्न विभागों में , हिंदी भाषा में काम करना अनिवार्य हैं । अतः केन्द्र/राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों और इकाइयों में हिंदी अधिकारी , हिंदी अनुवादक , हिंदी सहायक , प्रबंधक (राजभाषा) , जैसे विभिन्न पदों की भरमार हैं । निजी टीवी और रेडिओं चैनलो की ष्षुरुवात और स्थापित पत्रिकाओं /समाचार पत्रों के हिंदी रुपान्तर आने से रोजगार के अवसरों में कई गुणा वृद्धि हुई हैं । हिंदी मीडिया के क्षेत्र में संपादको , संवाददाताओं , रिपोर्टरों , न्यूजरीडर्स , उप-संपादकों , प्रूफ-रीडरों , रेडिओं , जाॅकि , एंकर्स आदि की बहुत आवष्यकता हैं । इनमें रोजगार की ईच्छा रखने वालों के लिए पत्रकारिता /जन-संचार में डिग्री /डिप्लोमा के साथ-साथ हिंदी में अकादमिक योग्यता रखना महत्वपूर्ण हैं । कोई व्यक्ति रेडिओं /टीवी/सिनेमा के लिए स्क्रिप्ट राइटर/डायलाग राइटर/गीतकार के रुप में भी काम कर सकता हैं । इस क्षेत्र में प्राकृतिक और कलात्मक रुप में सृजनात्मक लेखन आवष्यक होता हैं । लेकिन किसी व्यक्ति के लेखन के स्टाईल में सृजनात्मक लेखन में डिग्री/डिप्लोमा निष्चित तौर पर निखार ला सकता हैं । इसमें प्रमुख अंतराष्ट्रीय लेखकों के कार्याे का हिंदी में अनुवाद करने का भी कार्य होता हैं । परंतु इस क्षेत्र के लिए द्धिभाषी दक्षता होना महत्वपूर्ण हैं । कोई व्यक्ति एक स्वतंत्र अनुवादक के तौर पर अपनी आजीविका संचालित कर सकता है और अपनी खुद की अनुवाद फर्म भी स्थापित कर सकता हैं । ऐसी फर्म अनुबंध आधार पर कार्य प्राप्त करती है तथा बहुत से पेषेवर अनुवादकों को रोजगार उपलब्ध कराती हैं । विदेषी एजेसिंयों से भी अनुवाद परियोजनाओं के अवसर प्राप्त होते हैं । यह कार्य आसानी से इंटरनेट के जरिए किया जा सकता हैं । विष्वभर में सिस्ट्रान , एसडीएल इंटरनेषनल , डेस्टाॅयर ट्रान्सलेषन ब्युरों , प्रोज आदि असीमित संख्या मंे भाषा कम्पनियां हैं । इसमें से ज्यादातर भाषाई -उन्मुख कम्पनियों से अनुबन्ध आधार पर भाषा सेवाएं प्राप्त करती हैं । सामान्यतः इन फर्माे में रोजगार के अवसर स्थाई या स्वतंत्र अनुवादकों तथा भाषान्तकारों के रुप में उपलब्ध होते हैं ।

अब हम हर वैश्रिक प्रकाषन घटाने को बहुसंख्यक लोगों के बीच , विषेषकर हिंदी क्षेत्र में अपना स्थान बनाने के लिए संघर्षरत पाते हैं । आष्चर्यजनक रुप से प्रमुख अंतराष्ट्रीय प्रकाषन घरानों ने न केवल हिंदी प्रकाषन की ष्षुरुवात की है बल्कि उत्कृष्ट बिक्री लक्ष्य प्राप्त पुस्तकों के बड़े पैमाने पर अनुदित रुपान्तर हिंदी मंे प्रकाषित करना ष्षुरु कर दिया । अतः प्रकाषन घरानों में अनुवादक , संपादक और कम्पोजर के रुप में व्यापक अवसर मौजूद हैं । हिंदी भाषा में स्थातकोत्तरों ,विषेषकर जिन्होनें अपनी पीएचडी पूरी कर ली है , के लिए विदेषों में भी रोजगार के अवसर हैं । कुछ देषों द्वारा हिंदी को बिजनेस की भाषा स्वीकार किए जाने के फलस्वरुप विदेषी विष्वविद्यालय में षिक्षक के तौर पर भी परंपरागत षिक्षण व्यवसाय को चुना जा सकता हैं ।
हिंदी भाषा में काॅलेज /विष्वविधालयों द्धारा संचालित किए जाने वाले पाठ्क्रम विष्वविधालय /काॅलेज द्धारा संचालित पाठ्यक्रम:श्
1) अंतराष्ट्रीय हिंदी विष्वविघालय , पंचटीला , वर्धा (महाराष्ट्र ) एम.ए. , एम. फिल , पीएचडी
( भाषा प्रौधोगिकी ) हिंदी पाठ्यक्रम ।
2) हिंदी विभाग , हैदराबाद विष्वविद्यालय , हैदराबाद – 46 (आंध्रपद्रेष) हिंदी एम.ए. , एम.फिल, पीएचडी , कार्यात्मक हिंदी , हिंदी अनुवाद में स्नातकोत्तर डिप्लोमा हिंदी पाठ्य्रक्रम ।
3) उच्चतर षिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान , विष्वविद्यालय स्कंध , दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, टी. नगर , चैन्नई – 17 ( तामिलनाडु )
हिंदी साहित्य और भाषा में एम.एम. एम.फिल और पीएचडी , हिंदी अनुवाद मंे स्थानकोत्तर डिप्लोमा , हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा ।
4) दिल्ली विष्वविद्यालय , दिल्ली – हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर प्रमाण – पत्र ।
5) पुणे विष्वविद्यालय , पुणे – कार्यात्मक हिंदी में एम.ए.
6) बनारस हिंदू विष्वविद्यालय , वाराणसी (उत्तरप्रदेष ) कार्यात्मक हिंदी में एम.ए.
(पत्रकारिता)
7) अविनाषलिंगम डीम्ड युनिवर्सिटी फाॅर वूमैन , कोयम्बटूर (तामिलनाडु) कार्यात्मक हिंदी में एम.ए.
8) माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विष्वविद्यालय , भोपाल (मध्यप्रदेष) हिंदी पत्रकारिता मंे एम.ए.
9) आंध्र विष्वविद्यालय , विषाकापटट्म (आंध्रप्रदेष) हिंदी प्रत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा ।
10) चैधरी चरण सिंह विष्वविद्यालय , मेरठ (उ.प्र.) कार्यात्मक हिंदी में एम.ए.

11) दूरस्थ षिक्षण संस्थान , केरल विष्वविद्यालय , त्रिवेंद्रम (केरल) कार्यात्मक हिंदी में स्नातकोत्तर डिप्लोमा ।
12) दूरस्थ षिक्षा , बैगलौर यूनिवर्सिटी , सेन्ट्रल काॅलेज कैम्पस , अम्बेडकर विथि , बैगलौर (कर्णाटक) अनुवाद में स्नातकोत्तर डिप्लोमा हिंदी ।
13) एसएनडीटी महिला विष्वविद्यालय , मुम्बई (महाराष्ट्र ) अनुवाद हिंदी में स्नातकोत्तर डिप्लोमा ।
14) अलीगढ़ मुस्लिम विष्वविद्यालय , मुम्बई (महाराष्ट्र ) अनुवाद हिंदी में स्नातकोत्तर डिप्लोमा ।
15) इग्नू , नई दिल्ली अनुवाद हिंदी में स्नातकोत्तर डिप्लोमा हिंदी में सृजनात्मक लेखन में

संदर्भ: 1. स्मृति पर आधारित एवं गूगल अन्वेषण माध्यम ।
2. स्त्रोत – रोजगार समाचार पत्र
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– राजू सीताराम ष्
संप्रति: सहायक ( कार्यकारी निदेषक ) ष्
लेखक एवं षैक्षणिक परामर्षदाता
ॅतपजमत – ब्वनदेमसवत
दर्षना मार्गदर्षन केन्द्र ,
बदनावर जिला धार (मध्यप्रदेष)
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