भारतीय गाय – कामधेनु
सृष्टि की रचना में ,
- गाय “सुरभि ” का
प्रथम आगमन माना गया ,
ममता की पहचान बनकर ,
माँ शब्द का स्वर जग में गुंजा ।
भारतीय संस्कृति में परम्परा रही ,
पहली रोटी गाय को अर्पित होती हैं ,
श्रीकृष्ण गोपाल – गोविंद के रुप में
गौ सेवा की महिमा जग में होती हैं ।
कामधेनु का गोबर – मुत्र भी ,
पवित्रता का प्रतीक माना गया ,
जहाँ गौ सुरक्षित और सम्मानित हो ,
वहाँ समृद्धि का वास माना गया ।
भारतीय गाय के दूध में ,
पोषण का अद्भुत भंडार हैं ,
कॉर्बोहाइड्रेट , वसा , विटामिन से युक्त ,
स्वास्थ के लिए उपहार हैं ।
इसके गुणों में विशेष तत्व ,
शरीर और मन को सुदृढ़ बनाते हैं ,
बुद्धि विकास में सहायक होकर ,
जीवन में संतुलन लाते हैं ।
परंतु आज की परस्थिति में ,
गौ सेवा का भाव कहीं दिखता हैं ,
वृद्ध होने पर देखभाल के बजाए ,
उसे भटकते हुए भी देखा जाता हैं ।
समय है जागरुक बनने का ,
करुणा और संवेदना जगाने का ,
गौशालाओं के माध्यम से सेवा कर ,
इस धरोहर को सहेजने का ।
भारतीय गाय का सम्मान बढ़े ,
सुरक्षा और संरक्षण का भाव रहे ,
ज्ञान , समृद्धि और शान्ति का स्त्रोत बन ,
कामधेनु सदैव पूजनीय रहें ।
कामेधेनु , कामेधेनु , कामधेनु …
लेखक / साहित्यकार राजू गजभिये (सीताराम)



